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BIHAR की सरकार के विकास का पोल खुलते नजर आया जहाँ कंधे पर ढोये जाते है मरीज

एक ओर जहां विकास की बातें हो रही है और विकास के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं।
वहीं एक गांव ऐसा भी है जो लगभग् डेढ़ दशक से गांव में विकास की राह देख रहा है। आलम यह है कि शासन द्वारा सैकड़ों योजनाएं बनाई गई है, परंतु इन योजनाओं का लाभ भी इस गांव के वासियों को नहीं मिल पा रहा है। ग्रामवासी अपने ही स्तर पर अपनी परेशानियों को करने के प्रयास करते हैं और उसे ही विकास मान लेते हैं।

सिवान जिले के दुरौन्धा प्रखंड के कोडर गावं वार्ड नंबर 12 में एक ऐसा भी गांव है, जहां आजादी के सात दशक बाद भी एक अदद
पिच सड़क के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। लेकिन विकास इससे कोसों दूर है। जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक उपेक्षा कारण आज भी यहां के ग्रामीण कच्चे मार्ग से गांव में आने-जाने को विवश हैं।

इस गांव में जाने वाला पक डंडी रास्ता भी पानी में डूबने के तादाद पर है. यहां बारिश का पानी का लेबल ज्यादा है. जिसकी वजह से पैदल चलना भी मुश्किल है.

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